CONCOR

एक नवरत्‍न कंपनी
Container Corporation India Ltd.
कंटेनर की बात, कॉनकॉर के साथ
 
आंतरिक सुविधाएं और सेवा

आंतरिक सुविधाएं और सेवा

रेल मार्ग और सड़क मार्ग द्वारा माल की ढुलाई 1950-51 में 80 और 20 के अनुपात में थी वह 1997-98 में 40 और 60 के अनुपात में हो गई। बहुत से कथित फायदों की वजह से भारी और कम वॉल्‍यूम’ की सेंसेटिव जनरल गुड्स जो आम तौर पर समेकित की जानी थी, का परिवहन सड़क मार्ग से होने लगा। ग्राहक केन्‍द्रित सुविधाएं मिलना ही इस परिवर्तन का मुख्‍य कारण है। ग्राहकों की प्रत्‍येक आवश्‍यकता को पूरा करने हेतु हमने अपनी सेवाओं को उनके अनुरूप बनाया है। बड़ी कंपनियों की यातायात संबंधित आवश्‍यकताओं को पूरा करने पर हमारी दृष्‍टि है।

लम्‍बी दूरी और भारी ढुलाई के लिए रेल को फायदेमंद माना जाता है। इसके विपरीत, आज सड़क की स्थिति बहुत ही खराब, भीड़भाड़ और देरी (यातायात के समय का 38% वक्‍त चैक पोस्‍ट पर इंतजार में ही लग जाता है) के लिए जानी जाती है। अगर एक विकल्‍प दिया जाए की इसकी कोई गति, सुरक्षा की गारंटी और विश्वसनीयता सुनिश्चित करता है तो शिपर एक मॉडल को स्‍थानांतरित करने के लिए तैयार हो सकता है। 1966 में शुरू होने वाले विशेष भारतीय रेलवे विनिर्देश(आईएसआई) कंटेनरों में द्वार से द्वार घरेलू कार्गो के लिए बाजार मे प्रवेश किया जब भारतीय रेल कंटेनरीकृत कार्गो परिवहन के लिए जो पहली रणनीति बनाई उसके साथ ही भारत मल्टी मॉडल के मैप पर आ गया।

मार्च 1988 में कॉनकॉर को इसमें शामिल किया गया था। 1991 में यह केवल घरेलू कार्गो की ढुलाई हेतु शुरू किया गया था। इसके लिए आईएसओ मानक कंटेनरों का प्रयोग किया गया। 1993 और 1996 के बीच, घरेलू व्यापार में एक प्रमुख रूझान आ गया था, 1995-96 में कॉनकॉर का घरेलू व्यापार का कुल कारोबार का लगभग आधा प्रतिनिधित्व करता था। हालांकि, यह व्यवसाय बड़े पैमाने पर सीमेंट की ढुलाई से संबंधित था, जो परम्‍परागत रेल वैगनों की कमी की वजह से प्राप्‍त हुआ।

1997 तक, यह स्‍पष्‍ट हो गया था कि घरेलू यातायात को बढ़ाने की बहुत अधिक संभावना थी। यह कार्य केवल माल की आवाजाही जो की पहले सड़क से होती थी जिसे रेल मार्ग की रणनीति थोक पर ध्‍यान केंद्रित कर के ही इस काम को किया जा सकता है। इसलिए दिसंबर 1997, में एक अलग आंतरिक विभाग बनाया गया।

जिन वस्‍तुओं की अब ढुलाई सड़क मार्ग से की जा रही है उन्‍हे वापिस रेल मार्ग द्वारा ही किया जाना ही इस विभाग का उद्देश्‍य है। अलग-अलग कार्गो को कंटेनरीकृत करके भेजना और ग्राहकों को द्वार से द्वार तक व्‍यापक इंटरमोडल सेवा प्रदान कराना ही विभाग का लक्ष्‍य है।

आंतरिक अनुभाग टर्मिनल/हबों के एक नेटवर्क के माध्‍यम से कार्य करता है। वर्तमान समय में वहॉं विशेष रूप से 5 आंतरिक टर्मिनल हैं लेकिन कॉनकॉर टर्मिनल मानचित्र के 20 अन्‍य टर्मिनल भी आंतरिक सेवाएं प्रदान करते हैं। पॉलिसी के अनुसार, नए टर्मिनलों में से अधिकांश को अब संयुक्‍त आंतरिक/अंतरराष्‍ट्रीय टर्मिनल के रूप में शुरू करने की योजना बनाई जा रही है।

आंतरिक कार्गो की मुख्‍य परिसंपत्‍ति मानक 20 फीट कंटेनर है। वर्तमान में, टीईयू में कॉनकॉर के बेड़े में आंतरिक सेवाएं हेतु लगभग 8500 टीईयू हैं। इनमें से कुछ स्‍वामित्‍व वाले हैं तथा कुछ मांग की आवश्‍यकताओं के आधार पर लघु एवं दीर्घ अवधि हेतु लीज पर लिए जाते हैं। लीज के अतिरिक्‍त, कॉनकॉर खाली मूवमेंट के लिए विशेष कैबोटेज दरों के द्वारा पांरपरिक आईएसओ (अंतरराष्‍ट्रीय) कंटेनरों का प्रयोग करता है। इस तरह से जो कंटेनर आंतरिक कार्गो परिवहन में चलाए जाते हैं, चाहे वे खाली ही हों, ऐसे कंटेनर बहुत ही थोड़े समय के लिए उधार/लीज पर (सामान्‍यत: एक तरह के लिए) लिए जाते हैं, इस प्रकार से आंतरिक कार्गो की वहन क्षमता में समग्र रूप से वृद्धि होती है। यहॉं पर कार्गों के विशेष प्रकार को पूरा करने के लिए विभिन्‍न प्रकार के विशेष कंटेनर यथा ओपन टॉप, साईड डोर्स, टैंक और 22 फीट/हाई क्‍यूब कंटेनर भी हैं।

आंतरिक परिचालनों का जोर प्‍वाइंट से प्‍वाइंट की समयबद्ध ट्रेन की एक श्रृंखला चलाने में है। आंतरिक परिचालन का पूरा जोर एक सिरे से दूसरे सिरे पर निर्धारित ट्रेन चलाए जाने पर है। इन कॉनट्रैक सेवाओं से ‘विस्‍तृत हब-स्‍पोक नीति’ का निर्माण होता है। सड़क मार्ग और रेल मार्ग के माध्‍यम से बड़े हब टर्मिनल पर कार्गो का समेकन होता है जहॉं से ऐसी कॉनट्रैक सर्विस आपरेट होती है।

कॉनकॉर द्वारा आज शिपिंग लाइन खाली कंटेनरों का व्यापक परिचालन देश में निर्यात और आयात के अंतर के स्तर को संतुलित करने हेतु किया जाता है। इन कंटेनरों से कैबोटेजिंग द्वारा कॉनकॉर दोनों शिपिंग लाइनों और संभावित घरेलू ग्राहक के लिए एक भारी छूट की पेशकश कर सकती है। यह एक ध्‍यान देने का क्षेत्र तथा मात्रा और लाभप्रदता को बढ़ावा देने की नीति के रूप में दिखता है।

कॉनकॉर द्वारा मालभाड़ा के शुल्‍क हेतु सभी वस्‍तुओं को तीन श्रेणियों में बांटा गया है:-

  • सीसी(वहन क्षमता) : इस श्रेणी में भारी वस्‍तुएं आती है। जब कंटेनर में इन्‍हें भरा जाता है तो इनका वजन कंटेनर की वहन क्षमता तक पहुँच जाता है (प्राय: 20’ कंटेनर में 21.5 टन और 40’ कंटेनर में 27.5 टन)। भारतीय रेल 5 विशिष्‍ट वस्‍तुओं को सीसी की श्रेणी में कॉनकॉर के प्रयोग के लिए रखता हे। ये वस्‍तुऍं हैं:- (1) सीमेंट (2) इस्‍पात संयंत्रों से भेजा जाने वाला लोहा एवं इस्‍पात (3) पेट्रोलियम एवं अन्‍य हाइड्रोकार्बन ऑयल (4) अनाज एवं दालों तथा (5) खाद्य नमक।
  • एम(मिश्रित माल) : ऊपर वर्णित 5 वस्‍तुओं के अलावा, जिन वस्‍तुओं की रेलवे गुड्स टैरिफ में सीसी लोडेबिलिटी है उन्‍हें भी इस श्रेणी में शामिल किया गया हैं। जब किसी कंटेनर में ‘सीसी’ लोडेबिलिटी वस्‍तुएं अथवा ‘सीसी’ लोडेबिलिटी से कम वस्‍तुएं डाली जाती है तो वे भी इस श्रेणी में चार्ज की जाती है।
  • डब्‍ल्‍यू (वेट कंडीशन) : ऐसी वस्‍तुएं जिनका भार कंटेनर की पूरी जगह घेरने के बाद भी ‘सीसी’ से कम है । ऐसी वस्‍तुएं अलग से रेलवे गुड्स टैरिफ में सूचीबद्ध हैं।
रेलवे टैरिफ के अनुसार सीसी, एम तथा डब्‍ल्‍यू वस्‍तुओं की सूची

कॉनकॉर व्यापार रणनीति के तहत अपने आंतरिक व्यापार के विकास के लिए निम्‍नलिखित रूप से अभिव्यक्त किया जा सकता है -

  • कॉनकॉर सेवाओं के मूल्य निर्धारण के मामले में और अधिक लचीलापन लाने हेतु योजना बना रही है। तेजी से बदलते बाजार की स्थितियों के अनुरूप रोड होलियर्स अपनी कीमतों को बदलने में स्‍वतंत्र और सक्षम हैं जबकि कॉनकॉर मूल्य निर्धारण में सड़क होलियर्स के लचीलापन का मुकाबला नहीं कर सकती, लेकिन एक रेल सेवा प्रदाता होने के कारण वे ऐसा कर सकते हैं तथा कंपनी में भी एक टर्मिनल /गोदाम ऑपरेटर के रूप में ग्राहको को उनके द्वार तक सेवा देने की क्षमता है। यह मात्रा, ग्राहक प्रोफाइल,कार्गो विशेषताओं, कंटेनर उपलब्धता, खाली प्रवाह पैटर्न आदि पर भी विशेष छूट देती है।
  • एम्‍टी रिटर्न रेडिया(ईआरआर) को कम करना, अनुत्‍पादक ढुलाई की मात्रा को कम करना तथा और अधिक प्रतिस्‍पर्धी कीमते देने संबंधी हमारी योजना है।
  • कार्गो का समेकन : केवल माल भाड़ा हेतु प्रारंभिक टर्मिनलों पर कार्गो समेकन का डोमेन नहीं रहेगा। कॉनकॉर की समेकन एवं वितरण प्रबंधन प्रणाली में प्रवेश करने की योजना है।
  • सेवाओं के कस्‍टमाइजेशन ही नहीं बल्‍कि सेवाओं में परिसंपत्‍ति संबंधी जरूरत भी महसूस की गई है। कंटेनर, टर्मिनल, वेयरहाउस, वैगन आदि को ग्राहकों की आवश्‍कताओं के अनुसार डिजाइन किया जाएगा। कंपनी ग्राहकों के स्‍टेकहोल्‍डिंग (वित्‍तीय कमिटमेंट) को आमंत्रित करती है जिसे परसंपत्‍ति के रूप में प्रदान किया जाएगा।
  • एक हब से दूसरे बडे हब में जाने के लिए कॉनकॉर द्वारा मुख्‍यत: रोड हब व रेल हब का प्रयोग किया जाएगा ताकि रेलगाडिया अगले प्रमुख केंद्र में जा सके। इस प्रणाली से कॉनकॉर इसके संचालन में सड़क और रेल के बीच पूरकता को प्राप्त करने में मदद मिलेगी।